Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai ReviewHai Jawani Toh Ishq Hona Hai trailer

Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai Review: यदि आप 90 के दशक की गोविंदा और डेविड धवन वाली ‘दिमाग घर छोड़कर देखने वाली’ कॉमेडी फिल्मों के फैन हैं, तो बॉलीवुड के कॉमेडी किंग डेविड धवन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ (Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai) के साथ सिनेमाघरों में लौट आए हैं। 5 जून 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म में मुख्य भूमिका में वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े हैं।

डेविड धवन ने अपने बेटे वरुण के साथ मिलकर ‘साजन चले ससुराल’ और ‘घरवाली बाहरवाली’ जैसी अपनी पुरानी फिल्मों के फॉर्मूले को नए रंग-रूप में पेश करने की कोशिश की है। आइए एक सीधे पैराग्राफ में जानते हैं कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है।

फिल्म की कहानी जसविंदर यानी जस्स (वरुण धवन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक वेडिंग फोटोग्राफर है। जस्स की शादी कॉर्पोरेट में काम करने वाली बानी (मृणाल ठाकुर) से होती है, लेकिन दोनों के बीच प्राथमिकताओं को लेकर विवाद हो जाता है, क्योंकि बानी फिलहाल करियर पर ध्यान देना चाहती है और जस्स को परिवार शुरू करना है। कोर्ट उन्हें सोचने के लिए 6 महीने का समय देता है, और इसी बीच जस्स की जिंदगी में प्रीत (पूजा हेगड़े) की एंट्री होती है, जिसके पीछे उसका खतरनाक भाई जोगी (जिमी शेरगिल) पड़ा हुआ है।

कहानी में असली कड़क ट्विस्ट और पागलपन तब शुरू होता है जब जस्स की अलग हो चुकी पत्नी बानी और उसकी नई गर्लफ्रेंड प्रीत, दोनों एक ही दिन एक साथ अपनी प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) की घोषणा कर देती हैं! इसके बाद जस्स खुद को बचाने के लिए झूठ का जो जाल बुनता है, उससे थिएटर में जबरदस्त कन्फ्यूजन और हंसी का माहौल बनता है।

Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai Review

अभिनय की बात करें तो वरुण धवन ने गोविंदा के पुराने अंदाज और कॉमिक टाइमिंग को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी है। दो अभिनेत्रियों में, मृणाल ठाकुर इमोशनल और ड्रामा सीन्स में ज्यादा सहज लगी हैं, जबकि पूजा हेगड़े का रोल ज्यादातर स्क्रीन पर ग्लैमर बढ़ाने तक सीमित रहा। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका सपोर्टिंग कास्ट है; जिमी शेरगिल ने एक सख्त बड़े भाई के रूप में शानदार कॉमेडी की है, जबकि मनीष पॉल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव और मौनी रॉय ने अपने छोटे-छोटे दृश्यों से फिल्म को काफी मजेदार बनाया है।

हालांकि, लेखक फरहाद सामजी के कुछ तुकबंदी वाले डायलॉग्स और सेकंड हाफ में खिंचती कहानी फिल्म की रफ्तार को थोड़ा धीमा कर देती है। कुल मिलाकर, यदि आप बिना लॉजिक वाली पुरानी बॉलीवुड कॉमेडी फिल्मों के शौकीन हैं और सिर्फ दो घंटे का टाइमपास मनोरंजन चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

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